राल गोशाला के विविध प्रकल्प
उमा कल्याण ट्रस्ट ने ब्रह्मऋषि श्री देवरहा बाबा गौ आश्रय स्थल, राल में गोवंश के पालन-पोषण की समुचित व्यवस्था करने के साथ ही इसे आत्मनिर्भर आदर्श गोशाला बनाने तथा गौ अभयारण्य के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न सेवा प्रकल्पों को प्रारंभ किया है।
इन सभी प्रकल्पों का उद्घाटन 20 दिसंबर 2025 को ‘गाय से जुड़ें’ कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष श्री शैलजाकांत मिश्र और वरिष्ठ अभिनेता श्री मनोज जोशी के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर पर स्वामी श्रीकृष्णानन्द जी महाराज, श्री अनंतगिरि जी महाराज, स्वामी श्री सूर्यानंद गिरी जी सहित अनेक संत, महात्मा, किसान, गौ सेवक आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।
ये सेवा प्रकल्प हैं — गौ उत्पाद केंद्र, पंचगव्य चिकित्सा केंद्र, गोबर गैस प्लांट, बिनौला घी उत्पाद केंद्र तथा बैल कोल्हू।
गौ उत्पाद केंद्र
गोशाला परिसर में गौ उत्पाद बनाने के लिए एक नया विभाग प्रारंभ किया गया है, इसके लिए गौ उत्पाद कारखाने का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
गौ उत्पाद केंद्र में गोबर और गोमूत्र से दीपक, धूपबत्ती, संब्रानी कप, मंजन, मूर्तियां आदि विभिन्न प्रकार के उत्पाद बनाये जाएंगे। उत्पाद बनाने के लिए यहाँ प्रशिक्षण देने का प्रबंध भी किया गया है।
देशी गाय के गोबर से बनने वाले उत्पादों की बिक्री के लिए एक बिक्री केंद्र की व्यवस्था भी की जा रही है।
गौ उत्पाद केंद्र में रॉ मटेरियल कक्ष, गोमय धूपबत्ती कक्ष, गोमय साबुन कक्ष, गोनाईल कक्ष, गोमूत्र अर्क कक्ष, तैयार माल कक्ष, पैकिंग कक्ष, प्रयोगशाला आदि अलग-अलग कक्ष तथा उत्पाद बनाने के लिए आवश्यक उपकरण, जैसे गोबर पीसने की मशीन, उत्पाद सामग्री मिलने के लिए मिक्सर, धूपबत्ती बनाने की मशीन, धूपबत्ती सुखाने का ड्रॉयर, संब्रानी कप बनाने की मशीन आदि की व्यवस्था है।
गौ उत्पाद केंद्र में ग्वालों और किसान परिवार की महिलाओं को उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे वे स्वयं उत्पाद बनाकर स्वावलंबी हो सकें।
इसके अतिरिक्त जैविक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को गोबर और गोमूत्र से खाद और उर्वरक बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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गोबर और गोमूत्र से विभिन्न उपयोगी उत्पादों का निर्माण।
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स्थानीय ग्वालों एवं किसान परिवार की महिलाओं को प्रशिक्षण।
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जैविक खाद एवं उर्वरक निर्माण के लिए किसानों को प्रशिक्षण।
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उत्पादों के लिए बिक्री केंद्र की व्यवस्था।
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आधुनिक मशीनों एवं प्रयोगशाला की सुविधा।
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ग्रामीण परिवारों को स्वावलंबी बनाने की पहल।
पंचगव्य चिकित्सा केंद्र
उमा कल्याण ट्रस्ट ने राल गोशाला परिसर में पंचगव्य चिकित्सा की योजना भी तैयार की है।
पंचगव्य चिकित्सा आयुर्वेद की एक प्राचीन पद्धति है, जो देशी गाय के पाँच उत्पादों — दूध, गोमूत्र, गोबर, दही और घी के मिश्रण पर आधारित है। पंचगव्य उत्पादों के आंतरिक और बाहरी उपयोग की परंपरा में शरीर के त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर करने पर जोर दिया जाता है।
पंचगव्य के मुख्य घटक:
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दूध: पोषण और शक्ति के लिए।
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गोमूत्र: पारंपरिक चिकित्सा में जैव-वर्धक और उपचारक के रूप में उपयोग।
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गोबर: पारंपरिक रूप से स्वच्छता एवं जैविक उपयोगों में प्रयुक्त।
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दही: पाचन और प्रतिरक्षा के लिए।
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घी: शरीर को पोषण देने तथा औषधीय उपयोगों में सहायक।
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शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य एवं स्वस्थ जीवनशैली पर केंद्रित पहल।
पंचगव्य चिकित्सा से विभिन्न बीमारियों, जैसे कैंसर, मधुमेह, गठिया, त्वचा रोग, श्वसन संबंधी समस्याएं, रक्तचाप आदि में राहत मिलने का दावा किया जाता है। हालांकि,गंभीर या दीर्घकालिक रोगों के उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह और प्रमाणित चिकित्सा पद्धतियों को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
पंचगव्य चिकित्सा केवल रोगों के उपचार तक सीमित न रहकर व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य तथा स्वस्थ जीवनशैली पर भी ध्यान केंद्रित करती है, जिसमें जैविक भोजन और संतुलित दिनचर्या का पालन शामिल है।
गोबर गैस प्लांट
राल गोशाला में गोबर गैस (बायोगैस) प्लांट लगाया गया है। बायोगैस एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है, जो गोवंश के गोबर के एनारोबिक पाचन अर्थात बिना ऑक्सीजन के अपघटन से उत्पन्न होती है।
गोबर गैस प्लांट के मुख्य घटक:
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मिक्सिंग टैंक: गोबर और पानी को समान मात्रा में मिलाया जाता है।
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डाइजेस्टर: भूमिगत टैंक, जहाँ सूक्ष्मजीव गोबर का अपघटन कर गैस बनाते हैं।
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गैस होल्डर: उत्पन्न गैस, मुख्यतः मीथेन, को एकत्र करता है।
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आउटलेट टैंक: बची हुई स्लरी एकत्र होती है, जिसका उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जाता है।
गोबर गैस से लाभ
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सस्ती ऊर्जा: खाना पकाने और ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोगी ईंधन।
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उच्च गुणवत्ता वाली खाद: स्लरी का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है।
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पर्यावरण अनुकूल: प्रदूषण और लकड़ी पर निर्भरता को कम करने में सहायक।
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स्वच्छता: गोवंश के गोबर का उचित प्रबंधन सुनिश्चित होता है।
राल गोशाला में गोबर गैस प्लांट से उत्पन्न बायोगैस का उपयोग अन्नपूर्णा भोजनालय में किया जा रहा है।
वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 500 किलो गोबर से 25 m³ गैस प्राप्त हो रही है।
शुद्ध बिनौला देशी घी
राल गोशाला में देशी गाय का शुद्ध देशी घी उपलब्ध कराने के लिए ‘बिनौला घी’ बनाने का सिस्टम लगाया गया है।
आयुर्वेद में बिलौना घी को एक ‘रसायन’ अर्थात कायाकल्प करने वाला पदार्थ माना जाता है। इसमें ब्यूटिरिक एसिड पाया जाता है, जो आंतों के स्वास्थ्य और पाचन में सहायक माना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण यह समग्र स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए भी लाभकारी माना जाता है।
बैल कोल्हू
बैल शक्ति के उपयोग का संदेश देते हुए गोशाला परिसर में बैल से चलने वाला कोल्हू लगाया गया है।
बैल की मदद से पारंपरिक तरीके से बीजों को दबाकर तेल निकाला जाता है। इस प्रक्रिया में उच्च तापमान और रसायनों का उपयोग न होने के कारण तेल अपने प्राकृतिक गुणों, स्वाद और खुशबू को बनाए रखता है।
बैल कोल्हू तेल की विशेषताएँ:
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पारंपरिक निष्कर्षण: बैल द्वारा चलाए जाने वाले कोल्हू से तेल निकाला जाता है।
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पोषक तत्वों से भरपूर: आवश्यक फैटी एसिड, विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट।
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कोलेस्ट्रॉल-मुक्त: प्राकृतिक रूप से प्राप्त तेल कोलेस्ट्रॉल-मुक्त होता है।
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स्वस्थ वसा: मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड वसा का स्रोत।
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एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण: सूजन-रोधी गुणों के लिए जाना जाता है।
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अद्वितीय स्वाद और सुगंध: पारंपरिक प्रक्रिया के कारण विशिष्ट स्वाद और खुशबू।
बैल कोल्हू का तेल एक प्राकृतिक, पौष्टिक और बहुउपयोगी तेल है, जो भारतीय रसोई और पारंपरिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राल गोशाला की झलकियां
उमा कल्याण ट्रस्ट राल गोशाला को आधुनिक, स्वच्छ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर गौ आश्रय स्थल के रूप में विकसित कर रहा है।
Read More...मथुरा के राल में स्थित यह गौ आश्रय स्थल निराश्रित गोवंश की सेवा, संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित है।
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